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संग्रहालय


 एस0 पी0 नौटियाल संग्रहालय

संस्थान का संग्रहालय ; षक्तिषाली हिमालय, इसकी उत्पत्ति, दिक्काल में विकास, प्राकृतिक संसाधनों, भूवैज्ञानिक विगत काल में जीवन, भूकंपों तथा पर्यावरणीय पहलुओं की एक झलक दर्षाता है ।

संस्थान ने एक छोटा सा संग्रहालय स्थापित किया है, जो भ्रमणकर्ताओं तथा संस्थान में आने वालों मंे, विषेशकर विद्यालयी - छात्रों में बेहद लोकप्रिय है।

संग्रहालय की स्थापना का मूल उद्देष्य है कि छात्रों को तथा जनसाधारण को भूवैज्ञानिक प्रक्रियाओं से अवगत करवाया जाए तथा साथ ही साथ संस्थान की विषिश्ट उपलब्धियों की ओर ध्यान आकर्शित किया जाए

यह संग्रहालय, हिमालय भूविज्ञान तथा सामान्य भूविज्ञान पर वीडियो-फिल्मों सहित, मानचित्र, चार्ट नमूने, प्रदर्ष तथा विभिन्न षैक्षणिक जागरूकता के प्रदर्ष दर्षाता है।

संस्थान के षिक्षाप्रद स्कंध, संग्रहालय को देखने के लिए विभिन्न विष्वविद्यालयों, स्थानीय विद्यालयों से बड़ी संख्या में छात्र यहां आते हैं तथा जनसाधारण में तथा देष तथा विदेष से आने वाले भ्रमणकर्ताओं एवं अतिथियों में यह मुख्य आकर्शण का केन्द्र है । विभिन्न विद्यालयों, विष्वविद्यालयों तथा महाविद्यालयों से बड़ी संख्या में छात्र इसे देखने आए तथा उन्हें संग्रहालय के मार्गदर्षक भ्रमण करवाए गए । संग्रहालय में दर्षाया गया हिमालय का एक उच्चावच माॅडल तथा पर्यावरण पर मानवोद्भवी क्रिया-कलाप का प्रभाव दर्षाने वाली एक पेंटिंग दर्षकों में विषेश आकर्शण का केन्द्र हैं । इसके साथ ही विगत कई वर्शो के दौरान संयुक्त राज्य अमरीका, यू0के0, उक्रेन, थाईलैंड, आस्ट्रेलिया, जापान, नेपाल, फ्रांस, रूस, इस्रायल तथा कनाडा से आने वाले भ्रमणकर्ता संग्रहालय में पधारे । संग्रहालय ; राश्ट्रीय विज्ञान दिवस (28 फरवरी), राश्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस (11 मई), स्थापना दिवस (29 जून) तथा संस्थापक दिवस (23 अक्टूबर) को ’खुला दिवस’ मनाता है । विगत कुछ वर्शो में इन अवसरों पर संग्रहालय देखने के लिए भारी संख्या में छात्र तथा जनसाधारण यहाँ आए । ‘विज्ञान-सप्ताह‘ के दौरान दून घाटी के छात्रों के लिए विज्ञान-प्रष्नोत्तरी तथा निबंध प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं। देहरादून तथा आसपास के क्षेत्रों के विद्यालयों के छात्र इन प्रतियोगिताओं में भाग लेते हैं । उनके इन प्रयासों की सराहना के लिए, प्रतियोगिताओं के विजेता छात्रों को पुरस्कार वितरित किए जाते है जो योग्यता के क्रम में प्रथम, द्वितीय तथा तृतीय आने वाले विजेता छात्रों को प्रदान किए जाते हैं।

नए प्रदर्ष

जिराफ की विलुप्त प्रजाति का एक नया प्रदर्ष, व्यर्थ पदार्थों का सदुपयोग कर तैयार किया गया है (जो पर्यावरण के संरक्षण का संदेष देता है) तथा इसे जनसामान्य के लिए प्रदर्षित किया गया है ।

भूवैज्ञानिक काल-पैमाना तथा विभिन्न युगों में जीव-रूपों को दर्षाने वाली एक भूवैज्ञानिक घड़ी तैयार की गई है तथा इसे संग्रहालय के प्रवेष द्वार पर लगाया गया है । इसे ‘करैंट साईंस जरनल‘ के मुखपृश्ठ पर प्रकाषित किया गया है ।

 
   
 
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